Friday, 31 January 2014

Chhutpan Ke Sapano Me Khoya Hai Man



Chhutpan Ke Sapano Me Khoya Hai Man, Kabhi Jagate Kabhi Sote Roya Hai Man !!





Kabhi Vo Bachpan Ki Lukka Chhippi Me Muskrata Hai Man !





Mogali, Alif laila Ki Kahaniyo Ko Soch Khil Khilata hai Man !





Maa Ki Daant Aur Pathshala Ke Gharkaam Ko Soch Ghabraata Hai Man !





Kabhi Langadi Aur Kabhi Kabbaddi Me Kho Jata Hai Man !





Charane Ki Toffi Aur pachas Paise Ki Malai Kulfi Se Lalchata Hai Man !





Chhutpan Ke Sapano Me Khoya Hai Man ! Kabhi Jagate Kabhi Sote Roya Hai Man !!


गांधी एक ब्रैंड



आज़ादी कि लड़ाई के बाद गांधीजी चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी को भंग कर दिया जाए।  परन्तु नेहरु तथा कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य गांधीजी की इस बात से सहमत नहीं थे। कांग्रेस के सदस्यो और गांधीजी के बीच इस बारे में कुछ विचार विमर्श होता उससे पहेले गांधीजी ए दुनिया छोड़कर चले गए. आज़ादी के पहेले कांग्रेस ने आज़ादी कि लड़ाई में भागीदारी निभाई थी और आज़ादी के बाद वो देश पर एक राजनैतिक पार्टी के रूप में शासन करने लगे।





भारत का इतिहास गांधीजी और कांग्रेस को शीर्ष में रखकर लिखा गया है।  स्कूल कि इतिहास की किताबे पढने पर तो ऐसा लगता है भारत का इतिहास नहीं बल्कि हम गांधीजी और कांग्रेस कि आत्मकथा पढ़ रहे है। भारत कि आज़ादी कि लड़ाई में कई ऐसे स्व्तंत्रता सेनानी है जिन्हे कांग्रेस द्वारा लिखे इतिहास में कोई जगह नहीं मिली।  कुछ आज़ादी कि नेताओ को इतिहास कि किताबो एक दो अनुच्छेद मिल गए पर स्कूल में मास्टर साहब ने कह दिया था कि इन्हे याद करने कि जरूरत नहीं है क्योंकि छमाही परीक्षा के प्रश्नो में लोग महत्तवपूर्ण नहीं है। कांग्रेस ने गांधीजी को एक बड़ा ब्रैंड बना दिया और तब से आज तक उनके नाम को भुना रही है। 





इंदिरा नेहरु ने एक पारसी व्यक्ति से शादी कि थी।  परन्तु हिन्दू पारसी शादी में कुछ अड़चने आ गयी और इस अड़चन को दूर करने के लिए गांधीजी ने इंदिरा को अपना उपनाम गांधी दे दिया।  इंदिरा नेहरु अब इंदिरा गांधी बन चुकी थी।  गांधीजी एक ब्रैंड बन चुके थे।  पुरे भारत वर्ष में गांधीजी के करोडो प्रशशंक थे। गांधीजी का नाम चारो तरफ फ़ैल चूका था कि तभी एक दिन दहाड़े दोपहर में गांधीजी कि हत्या कर दी गई। जिस गांधीजी के खिलाफ कोई खड़ा नहीं हुआ उसे दिन दहाड़े गोलियो से छलनी कर दिया गया।  गांधीजी कि हत्या से लोगो में गांधीजी के प्रति सम्मान दिन दुगना रात चौगुना हो गया। गांधीजी कि हत्या के बाद उनकी और कांग्रेस कि ब्रैंड वैल्यू में काफी बढ़ोतरी हुई।  





क्या हत्या होने से लोग ब्रैंड बन जाते है ?





मेरे प्रश्न का जवाब कांग्रेस के जगह जगह टंगे पोस्टरो से मिल जाता है।  कांग्रेस के हर पोस्टर में आप गांधीजी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को देख सकते है।  जवाहरलाल नेहरु को तो जैसे कांग्रेस वाले भूल गए।  गांधीजी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी में क्या समानता है और क्यों ए कांग्रेस के हर पोस्टर पर नज़र आते है।  आप ने सोचा कभी इस बारे में ! गांधीजी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी इन सभी कि हत्या कि गई थी।  और इनकी हत्या के कारन इन्होने ने हमेशा लोगो के मन में अपनी एक नई तस्वीर बनाई।  कांग्रेस इस बात से भली भांति परिचित है और शायद इसलिए आपको गांधीजी उनके हर पोस्टर पर नज़र आते है।  





गांधीजी ने शायद भारत और कांग्रेस का राजनितिक भविष्य देखा था और शायद इसलिए वो चाहते थे कि भारत को स्व्तंत्रता मिलाने के बाद उन्होंने कांग्रेस को भंग करने कि मांग कि थी। हम सभी गांधी का सम्मान करते है पर इसका मतलब ए नहीं है कि कांग्रेस सिर्फ गांधीजी के नाम पर वोट मांगती फिरे।  यदि कांग्रेस कहती है कि वो गांधीजी के पथ पर चल रहे है तो १९८४ में हुए सिख्खो के कत्लेआम के बारे में कांग्रेस कि क्या राय है।  २ सीखो ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के इंदिरा कि हत्या कर दी और उसके बाद सिख्खो का कत्लेआम हुआ।  उनके एक बड़े नेता ने कहा जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो उससे कई और पेड़ उखड जाते है।





गांधीजी अहिंसा के पूजारी थे।  कांग्रेस ने कई मौको पर गांधीजी के विपरीत पथ पर जाकर राजनीती कि है। चाहे १९८४ का सीखो का कत्लेआम हो या फिर इंदिरा गांधी द्वारा भारत पर थोपा गया आपातकाल। कांग्रेस ने गांधीजी को एक बड़ा ब्रैंड बनाया और अब उस ब्रांड को अपने राजनितिक फायदे के लिए इस्तेमाल करते चले आ रहे है।


Thursday, 30 January 2014

घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए


घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए ,

सोना चांदी लुट गया , कोयला भी अब चोरी होए !



घोटालो की जैसे बाढ़ है आयी,

किसी ने 10 तो किसी ने 100 लाख करोड़ की लुटिया डुबोई !



अंधेर नगरी अनबुझ राजा,

टके शेर भाजी टके शेर खाजा !



गरीब का तो हाल बेहाल है,

नेताजी को सिर्फ बच्चो और बैंक बैलेंस का खयाल है !



काम नहीं करने को तो चोरी करवाते है

देश का पैसा बंदरो की तरह आपस में बाँट कर खाते है !



घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए ,

सोना चांदी लुट गया , कोयला भी अब चोरी होए !



Ghotalo Ko Dekhakar Diya Aam Aadmi Roye



Ghotalo Ko Dekhakar Diya Aam Aadmi Roye !


Sona Chandi Loot Gaya, Ab Koyala Bhi Chori Hoye !!





Ghotalo Ki Jaise Baadh Hai Aayee !


Kisi Ne 10 To Kisis Ne 100 Lakh Ki Lutiya Dubayee !!





Andher Nagari, Anbhuj Raja !


Take Sher Bhaji, Take Sher Khaja !!





Garib Ka To Haal Hee Behal Hai !


Netaji Ko Sirf Bachho Aur Bank Balance Ka Khayal hai !!





Kaam Nahi Hai Karanake Ko To Chori Karwate Hai !


Desh Ka Paisa Aapas Me Bandaro Ki Tarah Baatkar Khate Hai !!






Ghotalo ko Dekhakar Diya Aam Aadmi Roye !


Sona Chandi Loot Gaya, Ab Koyala Bhi Chori Hoye !!



Wednesday, 29 January 2014

कैसे बनेगा तीसरा मंच ?​


राजनीति मे हर नया दिन एक नए जोड़-तोड़ की शुरवात करता है. पिछले कुछ दिनों मे राजनितिक समीकरणों मे अमूलचुल परिवर्तन हुए है। आम आदमी पार्टी के राजनितिक प्रवेश से हुए दिल्ली के राजनीतिको गलियारो के परिवर्तन से सारा देश अचंम्भित रह गया। जंहा कांग्रेस के तीसरे सत्र कि परिकल्पना करना एक मूर्खता होगा, वही तीसरे मंच के विकल्प की बाते जोर पकड़ने लगी है। कुछ महीने पहेले बीजेपी और कांग्रेस के बाद बड़ी पार्टी बनकर उभरने वाली सपा अब खस्ताहाल है।

हाल ही मे हुए कई समाचार चैनलो के सर्वे के माध्यम से ये खबर सामने आई ​है की बीजेपी​ उत्तर भारत और मध्य भारत में चमत्कार दिखा सकती है और दूसरी तरफ बीजेडी, एआएडीऍमके, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड जैसी ​प्रादेशिक पार्टिया ​भी उनके राज्य में मजबूत हो​ती दिख रही है ​

क्या तीसरा मंच एक विकल्प है?

श्री मनमोहन सिंह ने कुछ ही महीनो पहेले आपने साक्षत्कार मे कहा की गटबंधन की राजनीति मे फैसले लेने काफी कठिन है जिसके कारण आर्थिक बदलाव लाने मे दिक्कते आ रही है. हम भूतकाल मे देख चुके है की किस तरह वामदल ने परमाणु अनुशंधन के फैसले पर UPA -1 से अपना समर्थन वापस ले लिया, UPA -2 मे ममता दीदी ने एलपीजी, डीसेल और एफडीआई के मुद्दे पर अपना समर्थन वापस ले लिया. भाजपा भी NDA के शासनकाल मे गटबंधन की राजनीति के विरोध को देख चुकी है.

वर्तमान समय मे कांग्रेस के पास २०० से भी ज्यादा सांसद है परन्तु श्री मनमोहन सिंह के अनुसार गटबंधन के चलते कड़े फैसले लेने मे सरकार को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. तीसरे मंच के सबसे बड़ी पार्टी के पास ​३० से अधिक सांसद नहीं होंगे, तीसरे मंच का समीकरण कांग्रेस के वर्तमान सांसदों की गिनती का ठीक उल्टा है. तीसरे मंच मे कई छोटी मोटी प्रादेशिक पार्टिया होंगी २०० से भी ज्यादा सांसदों का गटबंधन होगा जिससे निर्णय लेना और कठिन हो जायेगा.

इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते की ​तीसरे मंच​ कि ​​सभी पार्टिया बन्दर बाँट मे लग जाए​ और राष्ट्रिय मुद्दो को छोड़कर सिर्फ अपने राज्यो के बारे में सोचने लगे। ​

यदि आप ने कांग्रेस और भाजपा के समय मे भारत मे कोई प्रगति नहीं देखी तो आप तीसरे मंच से ज्यादा उम्मीद नहीं लगा सकते है।

Tuesday, 28 January 2014

दिग्विजय सिंह - राज्यसभा के रास्ते


श्री दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकन भरने कि घोषणा कि है। ए वही दिग्विजय सिंह है जीने लोग राहुल गांधी का गुरु बताते है। दिग्विजय सिंह ने हमेशा कांग्रेस कि रणनीती बनाने में एक अहम् रोल निभाया है। परन्तु उनके राज्यसभा भा नामांकन से ए बात तय हो गयी है कि स्वंय उन्हें अपने रणनीतीयो पर भरोशा नहीं रहा है। इसलिए उन्होंने संसद में जानेवाली सबसे आसान राह का सहारा  लिया है।



एक सेनापति जो अपने सैनिको से युद्ध में जान कि बाजी लगाने के लिए कहता है अगर वो स्वंय युद्ध के मैदान से चला जाए तो उस सेना का क्या हाल होगा। मधुसूदन मिस्त्री भी लोकशभा चुनावो के लिए कोंग्रेस के रणनीति बना रहे है परन्तु उन्होंने भी राज्यसभा नामांकन भर दिया है। एक सेना तभी जीत सकती है जब उनका सेनापति उनके साथ रणभूमि में खड़ा हो। कांग्रेस के रणनीतिकार एक एक करके मैदान से बहार जा रहे है।




राहुल गांधी का मानना है कि २०१४ का चुनाव कांग्रेस जीतेगी पर उनके रणनीतिकार जिस तरह राज्यसभा नामांकन भर रहे है। मुझे लगता है कि राहुल गांधी को सपने से जगाने कि जरुरत है।


Why Rahul Gandhi came on Times Now?



We all saw the Interview of the year between Rahuk Gandhi & Arnab Goswami. Rahul Gandhi did his best in interview and we all know that he has to learn a lot in politics. I salute Rahul Gahdi for taking the all the questions directly from Arnab. Rahul Gandhi should get award for appearing in interview against Arnab Goswami.






Why the Congress selected Times now than NDTV & CNN IBN?


I read in Hindustan Times that Congress men selected Times Now for interview as it’s most watched News Show. The News Hour has highest TRP in all prime time show. My theory B is not ready to accept what congress men are saying for Rahul Gandhi interview on Times Now. I am going here with all the speculations in my mind about Rahul Gandhi interview on Times Now.






Why Not NDTV?


We all know that NDTV has some soft corner for Congress. They must be having their own good amount of reason but we all know that they criticize the Congress very late than other news channel. For congress it’s channel of their friend which can be taken care of easily so they preferred Times Now than appearing on NDTV.






Why Not CNN-IBN?


We all know the real owner of CNN-IBN group. It’s sad part for democracy when a media house is owned by corporate business company, sadly CNN-IBN falls in this category. It’s been said many time in past that Congress & Reliance are very close to each other. It’s not difficult for congress to request Reliance that CNN-IBN should not carry negative story about congress. I want to make it clear that CNN-IBN has shown BJP as top party in pre-poll surveys. Congress can request them not to carry negative story.





Why Times Now?

We all know that it’s difficult for anyone control Arnab Goswami. We all know his interview with Omar Abdullaha. We all know how for weeks they carried story on Nitin gandkari. Congress knows they can’t manage the Times Now or to be precise Arnab Goswami. If Rahul would have come on NDTV & CNN-IBN then Arnab would have ripped Congress & Rahul Gandhi part by part so they preferred Times Now than NDTV & CNN-IBN.

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